मृदा निर्माण के कोई तीन कारकों को समझाइए | Murda nirman ke koi teen karko ko samjayiye

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मृदा निर्माण के कोई तीन कारकों को समझाइए

मृदा निर्माण के कोई तीन कारकों को समझाइए – दोस्तों इस पृथ्वी पर जो कुछ भी है. वह निर्मित है. उसके निर्माण की एक प्रक्रिया होती है. कुछ चीज मानव निर्मित है. और कुछ चीज प्रकृति द्वारा खुद ही निर्माण किया गया है. उन्हीं में से एक है मृदा. जिसे हम आम भाषा में मिट्टी के नाम से जानते हैं. मिट्टी क्या है. यह बताने की जरूरत नहीं है. क्योंकि हमारा जीवन मिट्टी के आसपास ही गुजरता है.

क्या आपने कभी सोचा है कि मृदा का निर्माण कैसे होता है. मृदा निर्माण की प्रक्रिया क्या है. अगर आपसे कोई सवाल कर दे कि मृदा निर्माण के कोई तीन कारकों को समझाइए तो आप थोड़े कंफ्यूज हो सकते हैं. हम इस आर्टिकल में मृदा निर्माण की प्रक्रिया और मृदा निर्माण के तीन कारकों के बारे में बताने वाले हैं. इसलिए इस आर्टिकल को अंत तक पूरा पढ़ें.

मृदा क्या है उसका महत्व बताइए।

मिट्टी पृथ्वी का सबसे ऊपरी परत या भाग होता है. यह अनेक प्रकार के खनिजों और जैविक अवशेषों से मिलकर निर्मित होता है.यह पौधों के विकास में सहायक होता है.

मिट्टी का महत्व – इस पृथ्वी पर सभी जीवों के लिए, जो स्थलीय जीव है, उनके लिए मिट्टी एक आवश्यक तत्व है. यह सभी स्थलीय जीवन के जीवन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मिट्टी पेड़ और पौधों को बढ़ाने में सहायक होता है. इसमें वह सभी आवश्यक पोषक तत्व होते हैं. जो पेड़ और पौधों के बड़े होने के लिए जरूरी है. यही नहीं मिट्टी अनगिनत जीवों का घर भी है, मिट्टी में कई कीड़े मकोड़े अपना निवास स्थान बनाकर रहते हैं. बात अगर मनुष्य की की जाए, तो मनुष्य का जीवन भी मिट्टी पर टिका हुआ है. हम अगर अपना घर बनाते हैं, तो उसका आधार मिट्टी है. हम अपने घर की नींव मिट्टी से ही शुरू करते हैं. हम अगर भोजन करते हैं तो उस भोजन के फलने फूलने का कारण मिट्टी है क्योंकि हम अपनी फसले मिट्टी में ही उगाते हैं.

मृदा निर्माण के कोई तीन कारकों को समझाइए

  1. जलवायु आधारभूत शैल
  2. जलवायु
  3. समय

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मृदा निर्माण के कोई तीन कारकों को समझाइए

१. जलवायु आधारभूत शैल –

चूँकि मृदा का निर्माण ही शैल यानी चट्टानों से होता है. इसलिए यह मृदा निर्माण के प्रमुख कारक होते हैं. मृदा निर्माण का प्रारंभ ही चट्टानों के टूटने या बिखरने से होता है. चट्टानों के टूटने या बिखरने के कई कारण हो सकते हैं. जिनमें से प्रमुख कारण प्राकृतिक रूप से भूकंप या ज्वालामुखी का फटना हो सकता है. मृदा की संरचना, मृदा का प्रकार और मृदा में उपस्थित होने वाले तत्व इन्हीं चट्टानों पर निर्भर करता है.

2. जलवायु

मृदा निर्माण में जलवायु भी सक्रिय कारक होता है. यह मृदा निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. ऐसा देखा गया है कि किसी जगह पर जहां दो अलग-अलग प्रकार की चट्टानें हो और वहां की जलवायु एक हो. तो वहां एक ही प्रकार के मृदा का निर्माण होता है. जबकि अलग-अलग चट्टानें होने के कारण अलग-अलग मृदा का निर्माण होना चाहिए. इससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह समान जलवायु के कारण होता है.और जलवायु मृदा निर्माण को बहुत प्रभावित तरीके से प्रभावित करता है.

3. समय

मृदा का निर्माण लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है. इसलिए समय को भी एक महत्वपूर्ण कारक कहा जाता है. ऐसा रिसर्च में पाया गया है कि लगभग एक से दो सेंटीमीटर की मोटाई की परत बनने में लगभग 200 से 300 साल तक लग जाते हैं. इसके साथ-साथ समय इसलिए महत्वपूर्ण कारक है क्योंकि समय के साथ मृदा के गुण में परिवर्तन भी देखा गया है. मृदा को भी उसके आयु के आधार पर युवा प्रौढ़ और वृद्धावस्था में बांटा गया है.

मृदा निर्माण कैसे होता है

उत्तर – मृदा निर्माण की प्रक्रिया – मिट्टी के निर्माण की प्रक्रिया अनवरत चलते रहने वाली प्रक्रिया है. यह समय के साथ चलती रहती है. और इसके बनने में सैंकड़ों वर्ष लग जाते हैं. मिट्टी का निर्माण चट्टानों के टूटने से शुरू होता है. हमारे पृथ्वी के अंदरूनी भाग चट्टानें हैं. प्राकृतिक घटनाएं जैसे भूकंप है या ज्वालामुखी के कारण जब वह चट्टानें टूटती हैं. उसके बाद जल, वर्षा, बर्फ, हवा और ग्लेशियर जैसे अनेक कारकों की वजह से वह छोटे-छोटे कण में बदल जाते हैं. और वही छोटे कण मिट्टी कहलाते हैं.

भारत में पाए जाते हैं मिट्टी के इतने प्रकार :

भारत विभिन्नताओं से भरा देश है. यहाँ की जलवायु और भौगोलिक संरचना एक सी नहीं है. कहीं समतल जमीन है तो कहीं पहाड़ ही पहाड़.. इसलिए यहाँ की मिटटी में भी विविधता है.. भारत में मिटटी के कुल 6 प्रकार पाए जाते हैं. उनके नाम निम्नलिखित हैं:

  1. काली मिट्टी
  2. जलोढ़ मिट्टी
  3. लाल मिट्टी
  4. लेटराइट मिट्टी
  5. मरुस्थली मिट्टी
  6. वन मृदा

वहीं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के द्वारा भारत में मिट्टी का वर्गीकरण कर उसे 8 प्रकारों में बाँटा है.

  1. काली मिट्टी
  2. जलोढ़ मिट्टी
  3. लाल एवं पीली मिट्टी
  4. लेटेराइट मिट्टी
  5. लवण मृदा
  6. जैव मृदा तथा पीटमय मृदा
  7. शुष्क मृदा
  8. जंगली मिट्टी

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