प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिकी । prayogik abhilekh pustika avn maukhik

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प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिकी

दोस्तों छात्र जीवन सीखने सिखाने का होता है. इसमें कुछ बातें हम कक्षा में पढ़ते हुए सीखते हैं. कुछ बातें हम प्रयोगशाला में प्रयोग करते हुए सीखते हैं. तो हमारा छात्र जीवन कहीं ना कहीं थ्योरी और प्रैक्टिकल के पहलुओं से घिरा होता है. किताबों को पढ़ना जहां थ्योरी के अंतर्गत आता है. वही ऐसी चीजों को करना जो हमारे लिए प्रायोगिक तौर पर उपयोगी है. प्रैक्टिकल का तौर पर आता है. ऐसे में प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिकी का महत्व बहुत बढ़ जाता है.

इस आर्टिकल में हम प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिक के बारे में समझेंगे. उसके महत्व के बारे में समझेंगे. और इसके साथ-साथ इसको लेकर ध्यान दी जाने वाली बातों को जानेंगे. जिससे आप इसमें और बेहतर कर सके. और अपना कौशल और निखार सके. साथ ही उन गलतियों के बारे में भी बताएंगे जिन्हें आपको नहीं दोहराना है.

क्या होता है प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिकी?

धीरे-धीरे हम हिंदी से दूर होते जा रहे हैं. ऐसे में कभी-कभी हिंदी इतनी जटिल हो जाती है कि उसे समझ पाना मुश्किल होता है. ऐसे में अगर पूछ दे कि प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिकी क्या होता है, तो समझ या समझा पाना मुश्किल होगा. लेकिन अगर इसकी अंग्रेजी बता दिया जाए तो आपके लिए थोड़ा आसान हो जाएगा. असल में जिस Practical record book and vice-voca को समझते हैं वही प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिकी है.

सरल भाषा में प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिकी का क्या अर्थ है

यह विज्ञान, गणित या सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों से जुड़ी प्रायोगिक पत्रिका है. जिसका उयोग प्रयोग या प्रोजेक्ट के संबंध में किया जाता है. यह उस विषय और और कार्य से संबंधित उत्पत्ति एवं अनुसंधान के बारे में जानकारी प्रदान करती है.

जैसे अगर विज्ञान की बात की जाए तो विज्ञान में भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान आते हैं. भौतिकी में छात्र जीवन में उपयोग होने वाले विभिन्न नियम जो भौतिक से जुड़े हुए हैं उन्हें प्रायोगिक तौर पर समझते हैं और उन्हें रिकॉर्ड करते हैं.

वही रसायन विज्ञान में छात्र पदार्थ हो या तत्वों के रासायनिक गुणों और अभिक्रियाओं के बारे में प्रयोग करते हैं. और उन्हें प्रायोगिक तौर पर समझकर रिकॉर्ड करते हैं.
इसके अलावा जीव विज्ञान के छात्र कोशिकाओं का अध्ययन करते हैं और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से सूक्ष्मतम स्तर पर उनकी संरचनाओं और व्यवहार को समझने का प्रयास करते हुए अवलोकन करते हैं और उसे लिखते हैं.

मौखिकी क्या है?

मौखिकी को उसे मौखिक अभिव्यक्ति के तौर पर परिभाषित किया जा सकता है. जब कोई शिक्षक हमसे प्रयोग से संबंधित कोई सवाल करते हैं और उसके बदले में हम उत्तर देते हैं. इसे ही मौखिकी यानी viva कहा जाता है.

अगर संक्षेप में कहा जाए. तो किसी भी छात्र के प्रयोगात्मक कौशल का आकलन करने के लिए जो सबसे उपयुक्त रणनीति अपनाई जाती है. वह प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिकी है.

प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका को कैसे तैयार करें

अगर आप प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका को तैयार करने को लेकर परेशान है. तो आपको निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अपनी प्रयोग पुस्तिका को तैयार करना है :

  1. प्रयोग का नाम या उद्देश्य
  2. प्रयोग के उपकरण और सामग्री या आवश्यक सामग्री
  3. प्रयोग का सिद्धांत
  4. प्रयोग की विधि या क्रियाविधि
  5. प्रयोग के दौरान अवलोकन
  6. प्रयोग का परिणाम
  7. प्रयोग से संबंधित सावधानियां

आपको इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए काफी साफ सुथरा तरीके से अपने प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका को तैयार करना है. आपको उपरोक्त सभी बिंदुओं को बिंदुवार तरीके से लिखना है. जिसमें प्रयोग के उद्देश्य से लेकर क्रियाविधि, परिणाम, अवलोकन और सावधानियां स्पष्ट तरीके से लिखी हुई होनी चाहिए.

प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका को तैयार करते समय इन बातों का ध्यान रखें

छात्र जीवन में प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका का विशेष महत्व है. यह आपके प्रयोगात्मक कौशल का आकलन करने का एक माध्यम होता है.इसलिए इसे बेहद गंभीरता से तैयार किया जाना चाहिए. आप निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए इसे बेहतर तरीके से तैयार कर सकते हैं :

आपकी प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका बेहद साफ सुथरी होनी चाहिए.

  1. यह कोशिश करें कि इसे तैयार करते समय परिणाम और अवलोकन को लेकर किसी की नकल ना की गई हो.
  2. प्रयोग शुरू करने से पहले प्रयोग का उद्देश्य आवश्यक सामग्री क्रियाविधि परिणाम को लेकर मानसिक तौर पर एक योजना बना लें.
  3. जिस तरह आप थ्योरी पार्ट को गंभीरता से लेकर पढ़ाई का हिस्सा मानते हैं. वैसे ही इसे भी गंभीरता से लेते हुए बेहतर तरीके से तैयार करें.
  4. इसको तैयार करते समय उपयुक्त समय ले, जल्दबाजी न करें.
  5. प्रयोग के लक्ष्य को लेकर अपनी समझ की स्पष्टता सुनिश्चित करें, प्रयोग के लक्ष्य को लेकर किसी प्रकार का संशय नहीं होना चाहिए.

मौखिक की एक कला है.

यह एक प्रकार का अलिखित कला है. जिसमें हम अपने आप को मौखिक तौर पर व्यक्त करते हैं. इसमें पारंगत छात्र या व्यक्ति किसी भी विषय पर अपने आप को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकता है. और अपनी बात को स्पष्ट तरीके से व्यक्त कर सकता है जो कि बेहतर प्रभाव डालता हो. सरल शब्दों में कहा जाए तो आप अपनी बात को कितने सरल और प्रभावी तरीके से कह सकते हैं यह आपकी मौखिकी के कौशल को दर्शाता है.

मौखिकी के संबंध में यह बातें जाननी है जरूरी

मौखिक की एक कला है. जिसे समय के साथ विकसित किया जा सकता है. इस पर कार्य करते हुए आप बेहतर तरीके से पारंगत हो सकता है.
इन बातों का रखें ध्यान :

  1. आपको संबंधित विषय की गहरी जानकारी होनी चाहिए
  2. आपको सरल और कम शब्दों में कहना आना चाहिए.
  3. आपकी बातों का क्रम प्रासंगिक होना चाहिए.
  4. विषय का केंद्र आपका ध्यान में रहना चाहिए. जिससे आप मुद्दे से भटके ना
  5. आपको सुनने वाले श्रोता किस स्तर के हैं, आपको इसकी समझ होनी चाहिए.
  6. मुद्दे को लेकर आपकी स्पष्टता आपके लिए बेहद आवश्यक है
  7. आप प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार रहे

मौखिकी के साथ कभी यह न करें

मौखिकी को लेकर हमारी बेहतर समझा का होना बेहद आवश्यक है, इसलिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  1. अति उत्साह से बचे और कम से कम शब्दों में अपनी अधिक से अधिक बातों को कहने का प्रयास करें.
  2. अधूरी जानकारी के साथ ज्यादा बातों से धोखा देने की कोशिश ना करें.
  3. अगर आप यह स्वीकार कर लेते हैं कि आपको किसी चीज को लेकर जानकारी नहीं है. तो यह ज्यादा बेहतर तरीका होता है.
  4. अपनी बातों में ईमानदारी रखें.
  5. अतिरिक्त और अप्रासंगिक बोलने से बचें
  6. कभी भी अति आत्मविश्वासी न बनें
  7. खुद को सर्वश्रेष्ठ ना समझे और लगातार पढ़ने और सीखते रहे

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प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिकी किस प्रकार महत्वपूर्ण है

चाय छात्र जीवन हो या पेशेवर जीवन प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिकी आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यह आपके प्रयोगात्मक कौशल का अभिन्न अंग है. और जीवन प्रयोगात्मक कौशल की कड़ी से हमेशा जुड़ा रहता है. छात्र जीवन भर इसमें बेहतर करते हुए हम बेहतर परिणाम का सकते हैं.और पेशेवर जीवन में हम अपने पेशेवर पहचान को बेहतर बना सकते हैं.

चूँकि यह हमारे प्रयोगात्मक कौशल के आकलन का एक तरीका है. जिसके माध्यम से हमारे प्रयोगात्मक कौशल को आंका जाता है. इसलिए इसको लेकर गंभीरता से कार्य करना हमारे लिए महत्वपूर्ण हो जाता है. ताकि हम प्रयोगात्मक कौशल का बेहतर विकास कर सके. और उसके सकारात्मक पहलुओं को अपने लिए बेहतर परिणाम के तौर पर सुनिश्चित कर सके.

निष्कर्ष: हम आशा करते हैं कि प्रायोगिक अभिलेख पुस्तिका एवं मौखिकी को लेकर आपके सारे सवालों का जवाब आपको मिल गया होगा. यह किस प्रकार महत्वपूर्ण है. इसको लेकर किस प्रकार कार्य करें. हमें किन चीजों से बचना चाहिए. इन सभी बातों को इस आर्टिकल के माध्यम से बताने का प्रयास किया गया है.

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