Ram bhagwan ki murti kisne banai, राम भगवान की मूर्ति किसने बनाई

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Ram bhagwan ki murti kisne banai (राम भगवान की मूर्ति किसने बनाई)

Ram bhagwan ki murti kisne banai – भगवान श्री राम अपने बाल रूप में अयोध्या में बने नए राम मंदिर में विराजमान हो चुके हैं. इस मौके पर अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया गया था. सेलिब्रिटीज, अलग-अलग क्षेत्र के बड़े-बड़े नाम उस कार्यक्रम में शरीक हुए. हमारे देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के हाथों भगवान श्री राम के बाल रूप रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई.

लेकिन क्या आप जानते हैं जिस रामलला की मूर्ति को देख आप भावुक हो उठे. उस मूर्ति को किन हाथों ने बनाया है. तो आईए जानते हैं कि राम भगवान की मूर्ति किसने बनाई (Ram bhagwan ki murti kisne banai), आखिर अयोध्या राम मंदिर के मुख्य शिल्पकार कौन है (Ayodhya Ram Mandir ke mukhya shilpkar kaun hai). जानते हैं सब कुछ. इसलिए आर्टिकल को अंत तक पढ़िए.

Ram bhagwan ki murti kisne banai (राम भगवान की मूर्ति किसने बनाई)

रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर उपस्थित हर व्यक्ति जो उनका प्रत्यक्ष दर्शन कर पा रहा था और हर वह व्यक्ति जो लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से इस कार्यक्रम को देख रहा था. भगवान श्री राम की पहली झलक पाकर भावुक होकर सबने खुले मन से शिल्पकार की प्रशंसा की. सब ने कहा कि आहा जिस रामलला की हमने कल्पना की थी, यह तो ठीक वैसे ही हैं. क्या आप जानते हैं कि रामलला की अद्भुत कल्पना को किन्होने साकार किया है? Ram bhagwan ki murti kisne banai (राम भगवान की मूर्ति किसने बनाई) है

रामलला की इस मूर्ति को जिन्होंने बनाया है, उनका नाम अरुण योगीराज है. यह मैसूर के प्रसिद्ध मूर्तिकार हैं. जानकारी के अनुसार यह मूर्तिकारों की पांचवीं पीढ़ी से हैं. और इनकी पिछली चार पीढ़ियां भी मूर्तिकारी का ही कार्य करती थी.

Ram lalla ki murti kisne banai (रामलला की मूर्ति किसने बनाई)

अयोध्या भगवान श्री राम की जन्मस्थली है. उनकी बचपन की कहानी अयोध्या की धरती से ही जुड़े हुए हैं. इसीलिए अयोध्या में बने नए राम मंदिर में भगवान श्री राम के बाल स्वरूप रामलला की मूर्ति स्थापित की गई है.

रामलला की मूर्ति ऐसी मनमोहक है कि जिन्होंने भी देखा वह मंत्रमुग्ध हो गए. उन्होंने यही महसूस किया कि भगवान श्री राम अपने बाल रूप में साक्षात दर्शन दे रहे हो. इस मूर्ति को बनाने वाले शिल्पकार अरुण योगीराज हैं. इनकी उम्र मात्र 37 वर्ष है. यह कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार योगीराज शिल्पी के सुपुत्र हैं.

Ayodhya ram mandir ke mukhya shilpkar kaun hai

अयोध्या राम मंदिर के मुख्य शिल्पकार भी अरुण योगीराज ही है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके पहले भी इंडिया गेट पर अमर ज्योति स्थल के पीछे स्थापित की गई सुभाष चंद्र बोस की 30 फीट ऊंची प्रतिमा भी इन्होंने ही बनाई थी.

इसके अलावा केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की 12 फीट की ऊंची प्रतिमा भी इन्हीं के कारीगरी का कमाल था. और इसके बाद ही अरुण योगीराज चर्चा में भी आए थे.

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Ram Bhagwan ki murti kisne banai है कि प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं तारीफ

जैसा कि आपको अब पता ही होगा कि यह इनका पहला कार्य नहीं है. इसके पहले भी यह कई कार्य कर चुके हैं. इसके पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके कार्यों की सराहना कर चुके हैं. लेकिन रामलला की मूर्ति सिर्फ कारीगरी की बात नहीं थी यह आस्था की बात थी. यह दिल से जुड़ा मामला था. इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने भी अरुण योगीराज की शिल्पकार को खुले मन से सराहा है. और सराहे भी क्यों ना. आखिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान राम लला की मूर्ति को साक्षात देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भावुक हो गए थे.

Ram lalla ki murti kisne banai कौन है अरुण योगीराज

भगवान श्री राम के बाल स्वरूप रामलाल की मूर्ति को देख हर कोई यह जानने को लेकर बेताब था कि आखिर राम लला की मूर्ति किसने बनाई है. और जब उन्हें पता चलता है कि उस व्यक्ति का नाम अरुण योगीराज है. तो सभी यह जानने को उत्सुक हो जाते हैं कि आखिर यह व्यक्ति है कौन है. तो आपको बता दें कि यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं. यह ऐसे मूर्तिकार के घराने से संबंध रखते हैं. जिनके पूर्वज राजा महाराजाओं के लिए मूर्ति बनाने का कार्य करते थे. उनके पूर्वज मैसूर राजा के कलाकारों के परिवार से संबंध रखते थे. अरुण योगीराज के पिता योगीराज शिल्पी भी एक जाने-माने मूर्तिकार हैं. और उनके दादा बसवन्ना शिल्पी भी बहुत ही उम्दा स्तर के शिल्पकार रहे थे.

सच हुई रामलला के मूर्तिकार को लेकर भविष्यवाणी

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आज उनकी जिस कारीगिरी की वजह से लोग उन्हें ढूंढ रहे हैं. उनके बारे में जानने को लेकर उत्सुक हो रहे हैं. वह अरुण योगीराज कभी पिता या दादा की तरह मूर्तिकार बना ही नहीं चाहते थे. उन्होंने तो 2008 में मैसूर यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की और प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगे. लेकिन कहते हैं ना कि अपने घर के बड़े बूढ़े बच्चों को देखकर उनकी भविष्य की झलक जान लेते हैं. ठीक ऐसा ही हुआ कि उनके दादाजी ने उनके बचपन में ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि ये बड़ा होकर मूर्तिकार ही बनेंगे. और उनकी भविष्यवाणी सच भी हुई. आज अरुण योगीराज कोई आम मूर्तिकार नहीं है. इनकी ख्याति अब विदेशों तक पहुंच चुकी है.

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