पुरस्कार कहानी की मूल संवेदना क्या है | Puraskar kahaanee kee mool samvedna kya hai?

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पुरस्कार कहानी की मूल संवेदना क्या है?

पुरस्कार कहानी की मूल संवेदना क्या है? – पुरस्कार हिंदी के प्रसिद्ध लेखक जयशंकर प्रसाद की लोकप्रिय रचना है. अगर इसके केंद्रीय पात्र की बात की जाए तो मुख्यतः दो पात्र हैं. नायक का नाम अरुण है. और नायिका का नाम मधुलिका है. मुख्य पात्र के तौर पर नायिका है. जो एक तरुण आयु की कन्या है.

इस आर्टिकल में इसे ही बेहतर तरीके से बताया गया है. तो आइए इस आर्टिकल को पूरा पढ़ते हुए जानते हैं कि Puraskar kahaanee kee mool samvedna kya hai?

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पुरस्कार कहानी की मूल संवेदना क्या है?

Puraskar कहानी एक तरह से आदर्श प्रधान कहानी के तौर पर कहीं जा सकती है. जहां भावना की अपेक्षा कर्तव्य को श्रेष्ठ बताया गया है. जहां व्यक्तिगत स्वार्थ के बजाय राष्ट्र प्रेम को दरजीह दी गई है. यहां द्वंद देश प्रेम और व्यक्तिगत प्रेम के बीच दिखाया गया है. इसके साथ ही बहुत खूबसूरती से दोनों ही प्रेम को समान महत्व दिया गया है. अब पुरस्कार कहानी की मूल संवेदना क्या है. इस विषय पर आते हुए मूल संवेदनाओं की बिंदुओं को नीचे बताया गया है:

पुरस्कार कहानी की मूल संवेदना क्या है?

पुरस्कार कहानी

पुरस्कार कहानी में जयशंकर प्रसाद ने मुक्ति चेतना को इतिहास के साथ योग कर अपनी रचना के माध्यम से अभिव्यक्त किया है.

उन्होंने ऐतिहासिक पात्रों का सहारा लिया है. जिसके माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को व्यक्त करने और जगाने का प्रयास किया है.

इसकी मुख्य किरदार नायिका अपने व्यक्तिगत प्रेम और राष्ट्र प्रेम के उधेड़बुन में फंसी हुई दिखाई देती है.

पुरस्कार जयशंकर प्रसाद की ऐसी रचना है. जिसमें प्रेम और राष्ट्र प्रेम दोनों ही पहलुओं को बहुत ईमानदारी से निभाते हुए दिखाया गया है.

पुरस्कार कहानी के मूल को अगर देखा जाए तो इसकी मुख्य नायिका एक सच्चे नागरिक होने का भी परिचय देती है.इसके साथ-साथ वह प्रेम की पराकाष्ठा को भी छूती है.

उसका प्रेमी जो दूसरे राज्य का है और उसके राज्य को लेकर साजिश रच रहा होता है. शुरुआत में नायिका अबोध भाव के साथ उसकी सहायता करती है. लेकिन जैसे ही उसके अंदर का राष्ट्र प्रेम विद्रोह करता है. तो अपने ही प्रेमी का सारा भेद अपने राज्य के सैनिकों और राजा के सामने प्रस्तुत कर देती है. यह उसके राष्ट्र प्रेम की पराकाष्ठा दिखाता है.

इसके बाद जब उसके प्रेमी अरुण को मृत्युदंड की सजा सुनाई जाती है और नायिका मधुलिका को पुरस्कार मांगने को कहा जाता है. तो पुरस्कार के रूप में अरुण के साथ ही प्राण दंड की मांग करती है.

अंतिम पॉइंट

मूल संवेदना वह गहन भाव है जो यह दिखाता है कि वह अपने राष्ट्र से भी गहन प्रेम करती है. और व्यक्तिगत तौर पर वह अपने प्रेमी से भी अथाह प्रेम करती है. साथ ही उसे इस बात का भी एहसास है कि वह अपने प्रेमी को रोक सकती थी. लेकिन अबोध चंचलता की वजह से उसने उसे बढ़ने दिया और उसे इस बात का पश्चाताप होने के साथ-साथ वह अपने प्रेमी के कृत्य की सहभागी भी मानती है. यही कारण हो सकता है कि वह अपने लिए भी मृत्युदंड की मांग करती है.

निष्कर्ष

पुरस्कार कहानी की मूल संवेदना क्या है. इस प्रश्न को बारीक तरीके से समझने और समझने का प्रयास आर्टिकल में किया गया है. हम आशा करते हैं कि यह आपके लिए बेहद ज्ञानवर्धक और हेल्पफुल रहा होगा. ऐसे ही अन्य कॉन्टेंट के लिए इस वेबसाइट को विज़िट करते रहे. और अपने किसी भी प्रश्न को आप कमेंट बॉक्स में लिख दें.

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